बुधवार, 7 अप्रैल 2010

लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार:16 को फांसी,आठ को उम्रकैद



पटना। बिहार के चर्चित अरवल जिले के लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार मामले में अदालत ने बुधवार को 16 दोषियों को फांसी तथा आठ को उम्रकैद की सजा सुनाई। वर्ष 1997 में लक्ष्मणपुर बाथे में 58 लोगों की हत्या कर दी गयी थी। आजीवन कारावास पाने वाले प्रत्येक दोषी पर अदालत ने 31,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने 17 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
पटना के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विजय प्रकाश मिश्रा की अदालत ने इस मामले की सुनवाई इस वर्ष 31 मार्च को पूरी कर ली थी। न्यायाधीश ने आज आरोपियों को सजा सुनाते हुए कहा कि इस नरसंहार में आठ-दस वर्ष से भी कम उम्र के बच्चों तक की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि इन बच्चों का दोष महज इतना ही था कि वे इस गांव में पैदा हुए थे। साथ ही अदालत ने कहा कि न्यायालय सजा देने के मामले में कोई कोताही नहीं बरतेगा। अदालत ने 16 दोषियों को फांसी तथा आठ को उम्रकैद की सजा सुनाई। न्यायालय में मौजूद बाकी 17 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। हालांकि बचाव पक्ष के वकिल सुनील कुमार ने न्यायालय के इस फैसला उचित कहा है। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में जाने की बात कही है। पीड़ित पक्ष के वकील चितरंजन कुमार सिन्हा ने फैसले को सही ठहराते हुए बरी किया गया लोगों को सजा दिलवाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
ज्ञात हो कि इस मामले में 46 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला गया था। 91 गवाहों ने अभियोजन पक्ष की तरफ से गवाही दी। सनद रहे कि एक दिसंबर 1997 को लक्ष्मणपुर बाथे गांव में निजी रणवीर सेना के सदस्यों ने 32 महिलाओं और पांच बच्चों सहित 58 लोगों की हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने मेहदिया थाना में दर्ज प्राथमिकी में 26 नामजद तथा 125 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया था। पुलिस ने 48 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था और 16 लोगों को फरार बताया था। पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक सुनवाई के दौरान इन में दो लोगों की मौत हो गयी।

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